विधार्थी जीवन मे सबसे पहले हमारा सामना होता हैं ,कक्षा मे एक अध्यापक एवं सहपाठियों के साथ श्यामपटट एवं चॉक का जो विधार्थी जीवन मे पढ़ने -पढ़ाने के तरीको की शुरुआत करतें हैं । इन सबमें सबसे महत्तपूर्ण होता हैं अध्यापक के बाद श्यामपटट एवं चौक की भूमिका । खाली श्यामपटट पर अध्यापक हमें चॉक से पाठ्यक्रम को पूरा करने का प्रयास करते हैं एवं पढ़ने -पढ़ाने की शुरुआता भी । ठीक उसी प्रकार अगर हम जिंदगी के साथ चॉक को जोरकर तो देखे तो बहुत ही महत्तपूर्ण भूमिका होती हैं ?हमारा जीवन एक तरह से देखा जाए तो ठीक उस श्यामपटट की तरह है जो बिल्कुल साफ एवं खाली होता हैं । और कर्मरूपी चॉक हमारे भविष्य रूपी श्यामपटट को भर देता हैं जो लाभदायक एवं शिक्षा प्रद होता हैं । और जीवन को एक दशा एवं दिशा दिखाने का प्रयास करता हैं । हो भी ना क्याे हमारा जीवन भी तो उसी खाली श्यामपटट की तरह होता हैं जो पूरी तरह खाली हैं । यह हमारे ऊपर तय होता हैं कि इस खाली जीवन मे किन प्रकार के शब्दों रूपी रंग या चॉक से परिभाषा रूपी चित्र तैयार किया जा सकता हैं । जीवन के संघर्ष मे साथ देने वाले कम भरोसा देने वालो का एक लम्बा रूप दिखाई देता हैं जो अक्सर हमारे जीवन को भ्रमित करने का कार्य करते हैं । इस संघ्रर्ष मे आत्म विशवास रूपी शिक्षक ही अपने ज्ञान के सारा जीवन को सुधारने का प्रयास करते हैं और वही विधार्थी जीवन के सबसे सच्चे साथी होते हैं । जो अक्सर चॉक से हमें जीवन पाठ पढ़ाते हैं । चॉक से हमें एक सबसे बड़ी सीख़ ये मिलती हैं कि समर्पण की भावना जो हमारा जीवन सुधारने के लिए अपना आस्तित्व समाप्त कर देता हैं । जिस प्रकार से चॉक विभिन्न कणो से मिलकर बनता हैं उसी प्रकार हमारा जीवन भी विभन्न गुणो - अव गुणो से भरा होता हैं । जिसमें से गुणो को प्रोत्सहित करने कार्य शिक्षक करता हैं । जो इन गुणो को एक परिभाषित रूप देने के लिए चाक का प्रयोग करता हैं । और फिर हमें तय करना पड़ता है कि हमारा भविष्य किधर सूरक्षित हैं जिस प्रकार चॉक का प्रयोग हम विधार्थी जीवन के दैनिक उपयोग मे करते हैं ठीक उसी प्रकार हमे जीवन के संघर्ष मे अपने अनुभवों का प्रयोग करना चाहिए जो हमारी गलतियों को दोहराये जाने के वसर कम होते हैं एक उदाहरण के तोर पर देखा जाए तो चॉक रूपी जीवन को सुधारने वाला यंत्र कभी मज़बूरी मे गलत रास्तो पर अग्रसर होकर अपना और अपने साथ समस्त मानव जीवन को भी संकट मे डाल सकता हैं । एक उदहारण के तोर पर देखा जाय तो जमल कसब का जीवन इसका बानजी भर हैं । अगर उसकी बताए हुए बातो और कठिन संघर्षो मे बीता ,जिससे उसकी अपनी इच्छा को मरकर जीना पड़ता था और इसी कारण उसे गलत रास्तो पर ले जाने मे आसान हुई । अगर शायद यहां पर उसके पिता एक बतौर शिक्षक उनके अंदर पनप रहे दुर्गणों को अच्छी तरह परख पाते ,या उसे चॉक रूपी शब्दों से उनकी समस्याओ को अच्छी तरह सुधारने का प्रयास करते तो शायद 2 6 /1 1 का दिन ना देखना पडता । कसाब भी शायद अच्छे बुरे को समझ पाता तो समस्त मानव जाति को शर्मिंदा और क्षति ना उठानी पड़ती कसाब को अगर चॉक का सही इस्तेमाल सिखाया जाता तो शायद उसकी जिन्दगी आज सुरक्षित और खुशहाल भी होती । उपरोक्त कहानी के माधयम से हम अपनी जिन्दगी मे चॉक के उपयोग से सही गलत का फैसला होता हैं । जो जीवन को एक सही दशा एवं दिशा प्रदान करती हैं । जीवन के क्षेत्र मे अगर चॉक को विभिन्न स्वरूपों मे देखा जाए तो वह हमारे जीवन मे एक सफल व्यक्ति को प्रभाषित किया जा सकता हैं । जो वह विधार्थी रुपी जीवन को सुधरता हैं । वही हमें अपने आदर्शो को लिखने का हुनर देता है । वही हमारी सफलता को एक चरण करता हैं । चॉक हमारे जीवन मे बदलते स्वरूप की तरह ही हैं जो धेिस जाता हैं ,पर अपने आदर्शो को नही छोड़ता है और एक वह हैं ,वह हैं चॉक अपना आस्तित्व समाप्त कर देता हैं ,सिर्फ इसीलिए कि इससे किसका जीवन सुधर जाएगा । मूल रूप मे देखा जाए तो हमें चॉक की तरह कि अपने कर्मों के प्रति समर्पित होना चाहिए ।
Friday, 10 April 2015
CHALK KI SAMARPAN
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment