Sunday, 15 February 2015

NARI KI SHIKAYAT

 समाज की विभिनं समस्याओ  मे दहेज प्रथा वर्तमान  समय  कि सबसे  गम्भीर समस्या  हैं। पुराने ज़माने मे  शादी  को एक धार्मिक ,पवित्र और अटूट सम्बन्ध के रूप  मे  माना  जाता हैं। विवाह  के  समय  माता -पिता  उपहार  स्वरूप  अपनी  लड़की  को  एक  छोटी  -सी  भेट  दिया  करते  थे  जिसमे  उनकी  मंगल  कामनाएं  निहित  होती  हैं। दहेज  प्रथा  ने  मनुष्य  परिवार  और सम्पूर्ण  समाज  के  सामने  बहुत  ज्यादा  गम्भीर  सामाजिक  एवं आर्थिक  समस्याए   उत्पन्न  की  हैं , आज  एक  संक्रामक  बीमारी  की  तरह  इसका  विस्तार  न  केवल  सभी  हिन्दू  जातिओ  मे  होता  जा  रहा  हैं, बल्कि  यह  समस्या  दूसरे  धर्मो  के  अन्य  लोगों  को  भी  प्रभावित  करने  लगी  हैं।  शिक्षा  और  आर्थिक  मे  सुधार  होने  के  साथ  ही  दहेज़  समस्या  से  भी  अधिक  गम्भीर  होती  जा  रही  हैं।  हम  दहेज़  की  वास्तविक  अर्थ  इसके  वर्तमान  रूप  को  समझने  का  प्रयत्न  करे।  आज  दहेज़ प्रथा  एक  गम्भीर  समस्या  के  रूप  मे  हमारे  सामने  आई  हैं।  हमारे  समाज  मे  जाति  प्रथा  भी  दहेज़  प्रथा  से  संबंधित  एक शिकायत  हैं।  वर्तमान  समय मे हिन्दू समाज मे दहेज़ प्रथा  जिस रूप मे विधमान हैं।  वर्तमान  समय  मे  तो  दहेज़  का  रूप इतना  फैल  चुका  हैं  इसे  यदि  सौदेबाजी  कहा  जाए  नहीं  होगा। आज  वर  पक्ष - दहेज़  के  नाम  पर कन्या  पक्ष  का  इंतना  शोषण  करता  हैं कि  इसके  लिए  जमीन , जायदाद  बेचनी  पड़  जाती  हैं , कभी -कभी कर्जदार  बनना  पड़ता  हैं।   इस  प्रथा  ने  विकृत  रूप  धारण  करके  समाज  मे  अनके  बुराईयो  को  जन्म  दिया  हैं।  भरता  मे  दहेज़  प्रथा  कारण  ही  कन्या  वध  प्रथा  प्रचलित हो  गई  थी।  राजस्थान  मे  लड़की  को  जन्म  होते  ही  मार  देते  थे , जिससे  उसके  विवाह  पर  दहेज़  का  झंझट  ही  न  रहे  और  न  ही  लड़के  पक्ष  के  सामने  झुकना  पड़े। वर्तमान  मे  गर्भ - अवस्था  मे  लिग  जॉच  प्रथा  भी  चल  पड़ी  हैं।  इसके  द्रारा  यदि  यह  मालूम  होता  हैं  कि  गर्भ  मे  लड़की  हैं  तो  लोग  गर्भपात  करवा  देते  हैं। इस  तरह  लड़की  के  जन्म  लेने  से  पूर्व  ही  हत्या  कर  दी  जाती  हैं। तथा  दहेज़  के  चकर  मे  कुछ  लोग  धन  का  गबन  इस  कारण  करते  हैं  की  वे  इस  धन  से  अपनी  कन्या  का  विवाह  कर  सके।  कुछ  पिता  इसी  कारण  बेईमानी  तथा रिश्वत आदि लेते है, तो कभी  इस कारण चोरी भी करते है। स्पष्ट है कि दहेज़ प्रथा के कारण आर्थिक अपराधों  में वृद्धि होती है। कुछ व्यक्ति  अपनी  पुत्री  का   विवाह  करने  के  लिए कर्ज लेते  हैं जिससे उनकी आय का ज्यादा  पैसा ब्याज मे ही चला  जाता हैं। वे अपना कर्ज को जीवन भर चूका नहीं पाते हैं।उनका सारा जीवन कष्ट मे गुजारना होता हैं। कभी -  कभी धन की कमी मे कई पिता अपनी 16 वर्ष की लड़की का विवाह किसी 45 -50 वर्ष के व्यक्ति से करने को  मजबूर हाे जाता है। जब पिता दहेज़ की धन राशि नहीं  जुटा पाते है तो वह अपनी पुत्री का विवाह किसी बूढे  व्यक्ति से कर के अपने कर्तव्य से मुक्त  हो जाता  है।आज भारत मे पढ़ी -लिखी लड़कियों  की कमी है जब  लड़कियाँ पढ़ी -लिखीं  होगी तो वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी। ऐसी लड़कियों को समाज मे अधिक माँग  होगी। उनके माता -पिता को अधिक दहेज़ की चिन्ता नहीं करनी पड़ेगी। एक पढ़ा -लिखा लड़का  विवाह के  लिए पढ़ी -लिखी लड़की को पसंद करता है ,उसके लिए धन की अपेक्षा  योग्य कन्या का अधिक महत्व होता है।  लड़कियाँ पढ लिखकर जब आत्मनिर्भर बनने लगेंगी तो उनकी आत्मनिर्भरता भी दहेज़ लालची का मुँह स्वतः  ही बन्द करने लगेगी। दहेज़ प्रथा को समाप्त करने के लिय सरकार को कठोर कानून बनाने चाहिए।  साथ ही इसका कठोरता से पालन करने की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।                  

    

  

2 comments:

  1. दहेज़ प्रथा बेहद गंभीर विषय है . आज भी शहर जो कि पढ़ा लिखा वर्ग पहचाना जाता है वो भी इससे अछूता नहीं है .. इस पर अंकुश पाने के लिए सख्त कानून की जरुरत है

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  2. बहुत अजीब है ये रश्म ए दहेज ,
    जहां एक बाप बेटी का घर बसाने के लिए ,
    अपना घर बेच देता है ॥

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